' बस होगा ही अच्छा 'bas hoga hi
M
0
Altın Yaprak
' बस होगा ही अच्छा '
मुझे दुःख जताने की कोई जरुरत नहीं
उम्मीदे कोई शोहरत भी कोई है ही नहीं
फिर भी तुम मेरे पास हो कोई वजह से
क्या कहूं दिलसे तुम कौनसी जगहपर हो बसे।.
नहीं लगती कोई मेरी किसी भी रिश्ते से
फिर भी बंधी हो गुमनाम सी एक डोरी से
में खींचा चला आता हूँ मंत्रमुग्ध सा
तुम ही तो हो आकर्षण जैसे सुगंध सा।
न ही तुम मेरी किश्ती की डोर हो
न ही कोई बारिश की बौछार हो
मै फिर भी कुछ ऐसा महसूस करता हूँ
हलके से मुस्कुराकर अपना सा एहसास करता हूँ
मेरा आसमान तुम बन चुकी हो
दिलो दिमाग पर पूरी छा चुकी हो
कहना कुछ बाकी नहीं और लिखने कि कोई हिम्मत नहीं
लगता है तुम्हारा मिलन हमारे किस्मत में नहीं।
अब जो भी होना है बस खोना है
उनके जाने का गम दिलमे बसाना है
कुछ और कर सकेतो उनकी मन्नत करना है
बस दिल कि बात सामने करने कि हिम्मत करना है।
बैरी पवन खुश्बू बिखेर रहा है
मेरी खस्ता हालात पर स्मित रैला रहा है
में सुधबुध खोकर सुन्न सा हो गया हूँ
बस न चाहते हुए भी खिन्नं हो गया हुँ।
कुछ रिस्ते ऐसे ही बन जाते है
वो अपने आपमें बेमिसाल होकर रह जाते है
इसको समजने की या कहने की आवश्यकता नहीं
बस सोच लो और समज लो येही नाजुकता है सही।
मैंने सोच लिया है 'कुछ न कुछ तो करना ही होगा'
मेरा सपना खुद ही संवारना या संजोना होगा
वो कभी कहकर व्यक्त नहीं कर पाएंगे महेच्छा
बस हम ने सोच लिया है ' जो भी होगा बस होगा ही अच्छा '
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş