कैसे भुलाउं...Kaise
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Altın Yaprak
कैसे भुलाउं
Tuesday, October 8,2019
10: 49 PM
माँ तु जी को कैसे भुलाउं?
मेरे दिल को कैसे समजाऊँ?
याद करके तुझे रोता जाऊं?
मन ही मन में डर भी जाऊं।
तेरा बिना एक पल चल ना पाऊं
तेरी लॉरी सुनने तरस सा जाऊं
तेरी आँखों में दुनियादेख पाऊं
और जन्नत का दर्शन कर पाऊं।
कोई कहे ना तू है बुरी?
तेरे बिना ये सृष्टि अधूरी
पृथ्वी की है तू तो धुरी
बात तो रहती बहुत अधुरी ।
मेरे जीवन की तू है व्याख्या
सारे जग ने ए ही आख्या
तेरे बिन मनमचल उठा
सारी दुनिया में गँवा में बैठा।
मेरा सर तेरे क़दमों को छुआ
जीवन मेरा जैसे तृप्त हुआ
तेरे बिना मेरासपना अधूरा
कैसे होगा मेरा जनम पूरा।
तू हो दुखी तो में रो पडूँ
सारीदुनिया से लड़ में पडूँ
ना करे कोई तेरे साथ गुस्ताखी
में ना देऊ उसे दिल से माफ़ी।
हसमुख मेहता
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