मै तो चली.. Mai
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Altın Yaprak
मै तो चली
शनिवार, ८ फरवरी २०२०
में तो चली, में तो चली
तेरी गली को छोड़ चली
तेरा साथ, में भूला के चली
दूसरी राह मैंने पकड़ ली।
तेरा साथ मुझे नहीं भाया
में कैसे बनाती तुझें साया?
तूने कभी मुझे, दिल से ना चाहा
ना कभी चाहा, ना की परवा।
मेरा बचपन, लाड से बिता
सपने में तू खूब सताता
यही सोचकर मेने, दिल को मनाया
तुझे छोडकर दूसरी, राह को अपनाया।
ना कभी तूने, हाल को जाना
ना कभी कोशिश की, करके बहाना
में हो गयी विचलित, ना कर सकी मना
सोच लिया मैंने करने को सामना।
वो देखता ही रह गया
मेरे जाने पे रोता हो गया
उसे लगा में, वापस आउंगी
उसके पास बैठकर, धीरे से मनाऊंगी।
ना मैंने देखा ना ही बुलाया
गम को उसने जल्दी भुलाया
मैंने खोने का जश्न मनाया
अपने आपको खुशनसीब पाया।
हसमुख मेहता
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