नहीं है इतना दम... Nahi
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Altın Yaprak
नहीं है इतना दम
सोमवार, २९अक्तूबर २०१८
नहीं है किसी में इतना दम
जो बदल दे मेरी ख़ुशी को गम
वो तो हम है जो जरूर कहते है
हमारी ख़ुशी में भी गम है।
ना आने दो
और नाही हवा दो
गम को गम ही रहने दो
पास ही नही फटकने दो
में मुस्कृराता हूँ
पर दिलमे रोता हूँ
मेरे गम मेरे है
वो तोअपने है।
में दुनिया को क्यों बताऊँ?
जग को कयो रुलाऊँ?
किसी को मेरे गम से कया लेनादेना?
सब को हे झेलना है गम अपना अपना।
आवाज दो "अय गम कहीं और जा के डेरा डाल "
हमारी बस्ती में तेरा नहीं है काम
ज़िंदा है तो तुझे जरूर से महोब्ब्त करेंगे
पर ज्यादा नहीं रखकर बिदा भी कर देंगे।
हमें गमे एतराज नहीं
पर वो हमारा हमराज नहीं
खुशी ही हमारा संकल्प है
गम का आना सिर्फ अल्प है।
हसमुख अमथालाल मेहता
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