ये ज़िन्दगी...
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Altın Yaprak
हाथ बांध कर क्या क्या दिखलाती है, ज़िन्दगी
मजबूर देख कर बड़ा इतराती है, ज़िन्दगी
ये जान लिया है तूने भी अभी
तक़दीर के हाथ खिलौना हैं हम सभी
वरना क्यों इस कदर झूला हमें झूलती
खुद नाचती है और तमाशा हमें दिखती
कहते हैं लोग की हम जी रहे हैं ज़िन्दगी
लेकिन तू जानती है तभी तो मौत के करीब ले जा रही है ज़िन्दगी
वक़्त के हाथ हम से कसरत करवाती है ज़िन्दगी
बदनाम इसको कर के फिसल जाती है ज़िन्दगी
अफ़सोस है की इतना भी नहीं बताती है ये ज़िन्दगी
ले जाकर हमको कहाँ सुलाती है ये ज़िन्दगी.
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