देश की शान.. Desh
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Altın Yaprak
देश की शान
गुरूवार, २७ जनवरी २०२२
ना हमने कभी ऐसा सोचा है
नाहीं देश को बेचा है!
जब तलाक जिस्म हमारा है
देश सबसे ऊपर और प्यारा है।
ना कोई छीन सकता आजादी
और नहीं कर सकता बरबादी
इसी सोच में डूबी रहती आबादी
बच्चा बच्चा देता दिलसे सलामी।
कितने साल हमने गुजारे
कितने मिट गए वतन के प्यारे!
या खुदा या बोलके बम बम बेम भोले
वो ही तो थे देश के मतवाले!
ना कोई अब नजरे लगा पाएगा
ना कोई गुलामी का दाग लगाएगा
हम मिट जाएंगे पर नापाक, पाँव नहीं पड़ने देंगे
हर इंच इंच की रक्षा करेंगे।
ना हमने कभी किसी की लालच किया
नाही सच को आंच आने दिया
जो भी किया वतन की हिफ़ाजत के लिए
दे दी हमेशा इजाजत बलिदान के लिए।
सुनहरा देश, सुनहरे सपने
हमवतन में है सब अपने
एक ही राह और एक ही चाह
मेरे देश की रहे शान और लोग कहे वाह!
डॉ। हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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