धरती का फूल.. Dharti
M
0
Altın Yaprak
धरती का फूल
शुक्रवार, ३ जनवरी २०२०
मुझे फूल ही कह लो
और बात भी सुन लो
में खुश्बूफैलाना चाहता हूँ
सब को एक सन्देश देना चाहता हु।
मुख्य पाँव तले कभी मत रोंदना
मेरा हंसना कभी ना छीनना
मुझे सुन्दर ही रहने दो
धरती के लोगों को पैगाम देने दो।
सुंदरता की सराहना करो
उसको दूर से देखकर खुश रहा करो
ये प्रभु की एक देन है।
मानो आपके जीने का एक मकसद है।
सौहार्दपूर्ण वातावरण ही शांति लाएगा
नफरत सभी को बर्बादी लाएगा
मान लो और तिरस्कार को तिलांजलि दे दो
सभी भाइयों को सहारा दे दो।
खुश्बूफैलाने का मकसद हो
समय अपना बर्बाद ना हो
जीवन अल्प और सच्चाई है
दी हुई जिंदगी पराई भी है।
मुझे सहारा दो
किसीको भी बेसहारा मत करो
अच्छी से जित लो
अपना जीवन साकार कर लो।
हसमुख मेहता
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş