बहुत हुआ - ग़ज़ल
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Altın Yaprak
टूटे हुए दिल का खज़ाना बहुत हुआ
दुनियां में तेरे अपना फ़साना बहुत हुआ
चर्चा जो हुआ बज़्म में शामो सेहर हुआ
इस रात में शम्मा का जलना बहुत हुआ
मिलती गयी जो मोहलतें वो भी बहुत हुई
तेरा यहाँ पे छुपना छुपाना बहुत हुआ
साहिल पे आ गया है 'आशी' थक और हार कर
अब लहरों का ये उठना उठाना बहुत हुआ
Bu şiiri puanla
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