बुलाती है मुझे दिशाएं
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Altın Yaprak
आवाज़ दे देकर बुलाती है मुझे दिशाएं
जाऊं मैं किस ओर कोई मुझे बताये
मंज़िलों का पता कब रास्ते हैं बताते
दिल की सुनो तुम अपने इशारा कोई बता दे
सोचो में तुम अपनी इतने न ड़ूब जाना
निद्रा तुम्हे कई फिर ना राहो में सुलादे
आज है जो शक्ती इच्छाओ में तुम्हारे
कल ये शरीर तुम्हारा चलने ही न पाए
बस उठ जाओ अब जगह से, चल दो किसी डगर पे
तुम ही बनो उजियारा इस अंधियारे शहर के
बहता है देखो पानी चलती है ये हवाएं
चंदा और सूरज भी चले है अपनी-अपनी दिशाएं
चिड़ियाँ भी देखो उठकर चहके है इस चमन में,
कोयल भी गीत गाये, नदिया बहती जाये
अब न रुको तुम अपने इस सफर में
उठने दो लेहेर को मन और मष्तिस्क में तुम्हारे......
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