कोई- Someone - Poem In Hindi
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Altın Yaprak
नैनों की डोरी से दिल की पतंग उड़ा रहा है 'कोई'
इस अंजनी दुनिया में अपना नज़र आ रहा है 'कोई '
ख्याल नहीं आते थे रातों को भी कभी
अब तो सूरज की रोशनी में सुला रहा है 'कोई'
धीरे धीरे कोहरा छटता जा रहा है
दूर का 'कोई ' राही जैसे पास आ रहा है
अब तो पलकों की चिलमन का द्वार जैसे खटका रहा है 'कोई'
इस अंजनी दुनिया में अपना सा नज़र आ रहा है 'कोई'
हथेली में चांदनी लिए
ज़िन्दगी को फरहा करने आ रहा है 'कोई'
चिलमिलती धुप में बरसात का एहसास करा रहा है 'कोई'
बचकानी हरकतों पर रोक लगा रहा है 'कोई'
पास आकर गुद -गुदा मुस्कुरा कर एक कमरा अपना
स्थायी बना रहा है 'कोई'
एक पागल दिल लगाकर, कलम चलाकर ये सब लिखता जा रहा है
जैसे ये सब बातें इसको बतला रहा है 'कोई'
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