क्या है वो - What It Is! ! !
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Altın Yaprak
पसेमंज़र भी है ग़ुरूब भी है
नज़र के सामने होकर
वो दिल से दूर भी है
जो छू ता हूँ तो सिमट जाती है
जो देखू गर तो शर्माती है
मिलके भी जो न मिटी एक प्यास है वो
ख़ामोशी का सदा एहसास है वो
सोये में नज़र आती है और जागे में गुमं है
न जाने किस शायर के पास है वो (जाने किस शायर के तस्सव्वुर का ख्वाब है वो)
बेवजह मुस्कुराती है कभी वजह पे रुलाती है
किस अदाकार का जज़्बात है वो
उड़ जाती है तितली बन के कभी
कभी शाहीन सा लेती है परवाज़ भी वो
समझ में आता नहीं ये चक्कर क्या है
गुल समझता रहा जबकि गुले गुलज़ार है वो
Bu şiiri puanla
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