खेट-कौतुक
R Rahim
Günün şiiri
· 19 Ağustos 2026
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Altın Yaprak
यत्पादपङ्कजरेणोः प्रसादमासाद्य सर्वभुवनेषु।
प्रणमामीष्टसुमूर्तिं तामहममराः प्रभुत्वतां यान्ति॥१॥
कमर्विलाधशालए नरोहि बामुरौवतः।
सदाबली च साबिरः सुकर्मकृद्यदा भवेत्॥२॥
मुश्तरी यदि भवेद् ज़रखाने,
बुज़रुगः परमपुण्यमतिः स्यात्।
कामिल: कनकसूनुयुतश्च,
ख़ूबरोहि मनुजो ज़रदारः॥३॥
आयुख़ाने चश्मख़ोरा मालख़ाने मुश्तरी।
राहु जो पैदावखाने शाह होवे मुल्क का॥४॥
रबी शत्रुखाने पड़ै उच्च का।
करै खाक दौलत फिरै जाबजा॥५॥
Kamu malı: şairin ölümünün üzerinden 70 yıldan fazla geçti.
Metnin kaynağı: Kamu malı arşiv
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