ऐसा क्यों? (Hindi)
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Altın Yaprak
एक बार पुनः मुझको ऐसा लगा
जैसे स्वयं अपने से ही
हो रहा हूँ जुदा
ऐसा क्यों?
एक बार तो ऐसा तब था हुआ
जबकि मैं झील में कूद कर
घात करने चला था
उस दिन मैं खंड खंड
विभाजित हुआ
कुछ ‘मैं’ मेरे साथ
कुछ ‘मैं’ अलग थलग
पहले पहल मुझको ऐसा लगा
जैसे अपने से ही हो रहा हूँ जुदा
ऐसा क्यों?
आज वो सब नहीं
किन्तु है, कुछ तो है.
आज मेरा मैं मुझसे बाग़ी नहीं
आज तुम मुझसे
हो रहे हो जुदा.
और ये निश्चित है कि
हम अब ‘हम’ नहीं
‘मैं’ हो गए हैं.
तुम दूर मुझसे चले जा रहे हो
लगता है मैं ही चला जा रहा हूँ
स्वयं दूर खुद से
मेरा एक हिस्सा है तुम में भी
अतः एक अदना हिदायत थमा दूँ तुम्हें
कभी फुरसत तुम्हें जो मिले
चुपके से अपने
हृदय के किसी कोने में देख लेना
उसी में बैठा मिलूँगा तुम्हें
देख लेना
एक बार पुनः मुझको ऐसा लगा
जैसे स्वयं अपने से ही
हो रहा हूँ जुदा
ऐसा क्यों?
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