बादल आये
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Altın Yaprak
बादल आये
हाथ मिलाये
पल भर बैठे
चले गये! !
हम पिछले
वर्षों की भांति
अबकी बार भी
छले गये! !
रुकें न जीवन
की यात्रायें
ख़त्म न हो
संभावनायें
चूर हैं थक के
मगर रुको न
अच्छे दिन सब
भले गये! !
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş