फूल 2 (Hindi)
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Altın Yaprak
वह पौधा मेरे कन्धों तक
जब पहुंचा तो फूल खिले
श्वेत रुई से कोमल कोमल
देख के मन में ख़ुशी हुई
फिर देखा था नभ की ओर
कुछ हैरत व प्रसन्नता से
श्रद्धा से औ' कृतज्ञता से
श्रम मेरा जो सफल हुआ
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş