Farewell / अलविदा (Hindi)
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Altın Yaprak
Farewell by Rabindranath Tagore
अलविदा: मूल रचना गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर
हिंदी भावानुवाद रजनीश मंगा द्वारा
मुझको छुट्टी मिल गयी है. मुझे विदा कीजिये भाइयो
मेरा आप सब को नमस्कार और अब इजाज़त दीजिये.
ये मेरे दरवाजे की चाबी कृपया वापिस लीजिये
कोई भी दावा मेरा अब इस घर पे बाकी है नहीं
जाने से पहले मैं आपका आशीर्वचन पा कर चलूँगा
लंबे समय तक हम पड़ौसी बन के आपस में रहे
किन्तु जितना तुमसे पाया मैं तो उतना दे न पाया
अब सुबह होने को है
और मेरे अँधेरे कोने को जिसने प्रकाशित था किया
वो दिया भी बुझ गया है.
बुलावा आ गया है और सफ़र के वास्ते तैयार मैं भी हूँ.
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