हमारे त्यौहार (2)
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Altın Yaprak
सर्दियों में धूप से मिलता हमें ज्यों प्यार हैं
इस तरह देते सुकून हमको सभी त्यौहार हैं
हर किसी के मुंह पे बातें नेक ख्वाहिशात की
और सभी के दिल में सबके वास्ते ही प्यार है
कहते हैं कि हम सभी संतान हैं परब्रह्म की
हम सभी से मिल के बनता स्वर्ग सा संसार है
प्यार की धारा हरेक दिल से निरंतर बह रही
सृष्टि सारी प्यार के ही मंत्र का विस्तार है
जो लड़ा कर भाइयों को अपना उल्लू साधते
उनसे कह दो नफ़रतों का बंद कारोबार है
दोस्तो जब भी मिलें हम गर्मजोशी से मिलें
मिलना सकारथ है तभी मिलना तभी त्यौहार है
कष्टकारी थे भले थोड़े हैं अब पतझड़ के दिन
शिशिर के उस पार प्यारे वो दिख रही बहार है
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