Winter / सर्दियाँ (Hindi)
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Altın Yaprak
Original Poem is by Walter de la Mare
मूल कविता: वाल्टर डी ला मेयर
हिंदी रूपांतरण: रजनीश मंगा
बर्फ को सहें
सर्द हवाएं बहें,
बिन पत्तों की टहनी पर
लाल छाती वाला रॅाबिन ऊंचे स्वर में
आज अकेला ही गाता है.
निस्तेज सूर्य है,
दिन भर का सफ़र संपन्न हुआ
सूर्यास्त समय की धूमिल किरणें
विस्तृत खिलते खेतों को छूतीं
स्वर्गिक धरती श्वेत हुई है.
अंधकार बढ़ता जाता है
चिंगारी से बढ़ते बढ़ते
घनी धुंध में आग जली है, और फिर
जमी झाग के सागर पर
तैर रही है धवल चांदनी.
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