नादान दिलnadan
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Altın Yaprak
नादान दिल
रविवार, ६ सितम्बर २०२०
नादान दिल ऐसी गलती ना कर
पछताएगा बाद में हाथ जोड़कर
दिल तेरे हाथ से निकल जाएगा
बस तेरे नहीं रह पाएगा।
जब देखा था तुजी को
काबू मे ना रख सका मन को
मन में एक मूर्ति बनकर छा गई
मीठी सी दिलमे पीड़ा दे गई।
कुछ आँखों से किए तूने इशारे
बस इसी अदापर तो हम हारे
दिल ने भर दी हामी ओर सर झुका दिया
मन ही मन आपको अपना लिया।
अभी तक में भटक रहा था
अँधेरो मे अपने को छुपा रहा था
उजाले से कोई मतलब नहीं था
पर किसीके लिए कोई फरेब भी नहीं था।
मतलब नहीं था और स्वार्थ भी नहीं था
कर गए कोई ऐसा जादू मनपर
छा गए दिल के द्वारपर
अब खोल देना और दे देना दस्तक
आप अक्षर बन गई और छप गई पुस्तक
डॉ जाड़िआ हसमुख
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