तुम याद आए Tum
M
0
Altın Yaprak
तुम याद आए
रविवार, ३ जून २०१८
तुम याद आए
दिन ना रहे भुलाए
कैसे कैसे दिन हमने बीताए?
याद कर के आँख में आंसू लाए।
कुदरत को ये मंजूर था
ना कोई भी लाचार था
बस दिल में एक ही विचार था
एक दूसरे का बनना था।
आज भी हम खुश है
पर दिल से नाखुशी है
जब भी बारिश आ जाती है
आँखों में नरमी ला जाती है।
मन करता है.तुम भी आ जाओ
पुराने पल मेंरे लौटाओ
वो नहीं भूल सकते दिल से!
मन भी व्याकुल रहता इस से।
आज मन करता
में दौड़ लगाके आ जाता
मेरी दास्ता में नहीं सुनाता
पर रहा भी नहीं जाता
हसमुख अमथालाल मेहता
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş