मेरे कश्मीरी दोस्तो! (Hindi)
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Altın Yaprak
मेरे कश्मीरी दोस्तो!
तुम्हें भले न याद रहा हो
पर दिल में मेरे सब ताजा है
वो प्यार तुम्हारा मेरे दोस्तो
मैं जब जब देखा करता हूँ
वो पैपियर मैशी की कला वस्तुयें
वो टेबल लैंप और फ़ोटो फ़्रेम
उपहार दिये थे तुमने मुझे
तीन दशक के बाद भी उनकी
बरकरार है आब अभी तक
याद मुझे आ जातीं बरबस
वो शाम फेयरवेल की भारी
दो वर्षों के कार्यकाल का
पता चला ना अंत हो गया
बवक्ते रुखसत थी आँख गीली
लौट के आना भी लाज़िमी था
मगर वहाँ पर जो छोड़ आया
समय, समां, वादियों की सदायें
फ़िरदौस यादों का है आज भी वो
मेरे कश्मीरी दोस्तो!
खुश रहो तुम जहां भी रहो
नज़ीर, शिब्बन, मूजू, मुग़लू, सतीश,
नानक सिंह, गुलाम रसूल, जावेद शेख़
क्षमा करें जिनका नाम भूला.
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