तुम्हारी याद
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Altın Yaprak
शूल सी चुभती हुयी
तुम्हारी अनुपस्थिति के बीच
कोई चमकीला तारा
विगलित हो कर
फैलता है सब तरफ़
आकाश सा.
सांध्य वेला
लौटते पाखियों में चंद
अर्ध विकसित चेतना के
लोथड़े उड़ते रहे
देर रात तक.
सुपारी सा काटते रहे मन
निर्ममता से
निर्दयता से
सरोते से जल्लादी क्षण.
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