खुशाली
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Altın Yaprak
तुम रहो ख़ुश हर-पल
यही दुआ हमारी
न तो सोना और न ही चांदी
बस बागबान रहे घर तमारा।।
कदम कदम के हर मुश्किलें तुम्हारी
हसी ख़ुशी ले लेंगे हम सारी
बस तुम रहो नौनिहाल
तो खुशाली अपने आप हो जाये हमारी।।
बस इत्ती सी ख्वाइश हमारी
जबतक रहे अस्मा पर
चाँद और सितारे टिमटिमाते
रौशनी तुम्हारी जगमगाये घर सरे।।
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